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volum 03 issue 12

भारतीय संस्कृति और संस्कार

Abstract

भारतीय संस्कृति विश्व संस्कृतियों का मूलाधार है। संस्कृति से तात्पर्य प्राचीन काल से चले आ रहे संस्कारों से है। मनुष्य द्वारा लौकिक-पारलौकिक विकास के लिए किया गया आचार-विचार ही संस्कृति है। सनातन परंपरा के अनुरूप संस्कार की पद्धति ही संस्कृति है। अन्य साहित्य ग्रन्थों को छोड़ दिया जाय तो प्रथम कवि द्वारा रचित रामायण के अन्तर्गत विभिन्न विषयों का अवलोकन अध्ययनोपरांत प्रत्यक्ष होने लगता है । इसी विचारधारा के अनुरूप साहित्य जीवन संघर्ष के प्रति प्रेरित करती रहती है। इसी दार्शनिक सिद्धांत का अतुल भण्डार महर्षि वाल्मीकि के चरित्र में विद्यमान है । एतदर्थ महर्षि वाल्मीकि का परिचय सर्वप्रथम प्रस्तुत कर रहा हूँ । 

Keywords
  • भारतीय,
  • संस्कृति
References
  • वाल्मीकीय रामायण
  • उपलब्ध पुराण साहित्य
  • संस्कृत साहित्य का इतिहास - आचार्य बलदेव उपाध्याय
  • संस्कृत साहित्य का समीक्षात्मक इतिहास - वाचस्पति गैरोला
  • संस्कृत साहित्य का इतिहास - कपिलदेव द्विवेदी
  • महाभारत - श्रीकृष्णद्वैपायन व्यास
  • रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास
  • भगवतीभाष्य वाल्मीकीयरामायण - जगदीश्वरानन्द
  • जातक साहित्य - दशरथ जातक, अनामक जातक और दशरथ कथानक
  • हेमचन्द्र कृत - जैन रामायण
  • कालिदास कृत रघुवंश महाकाव्य
  • प्रमुख रामकथाश्रित नाटक - भास कृत - प्रतिमा नाटक एवं अभिषेक नाटक
  • प्रमुख रामकथाश्रित नाटक - भवभूति कृत - महावीर चरित
  • प्रमुख रामकथाश्रित नाटक - अनंग हर्ष मयुराज कृत - उदात्त राघव
  • प्रमुख रामकथाश्रित नाटक - राजशेखर कृत - बालरामायण
  • प्रमुख रामकथाश्रित नाटक - दामोदर मिश्र कृत- महानाटक
  • कामिल बुल्के कृत - रामकथा
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How to Cite

Kumar, J. (2020). भारतीय संस्कृति और संस्कार. International Journal of Multidisciplinary Research and Studies, 3(12), 01–10. Retrieved from https://ijmras.com/index.php/ijmras/article/view/164

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